RCEP Kya Hai?- RCEP Full Form क्या है? जानिये RCEP in Hindi For UPSC के बारें में

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RCEP Kya Hai?- RCEP Full Form क्या है? – दोस्तों जैसा कि आप जानते है कि अभी कुछ दिनों पहले एक टर्म RCEP के बारें में सुना होगा जो कि काफी चर्चा में था। आज हम उसी के बारें में कुछ परीक्षा उपयोगी तथ्यों को जानेंगें जैसे – RCEP Kya Hai?, RCEP Full Form,RCEP Member आदि के बारें में जानेगें।

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RCEP Full Form क्या है? – “क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी” (Regional Comprehensive Economic Partnership-RCEP)

हाल ही में भारत सरकार ने 16 सदस्य देशों वाले क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी” (Regional Comprehensive Economic Partnership-RCEP) समूह में शामिल न होने का निर्णय लिया है। निर्णय की घोषणा करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि “RCEP अपने मूल उद्देश्यों को प्रतिबिंबित नहीं करता एवं इसके परिणाम न तो उचित हैं और न ही संतुलित।”

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गौरतलब है कि RCEP से जुड़ी भारत की चिंताओं को तमाम वार्ताओं के बाद भी दूर नहीं किया जा सका, जिसके कारण भारत को यह निर्णय लेना पड़ा। ध्यातव्य है कि भारत के अतिरिक्त अन्य सभी 15 देश वर्ष 2020 तक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

 RCEP Member Countries List 

आरसीईपी कुछ देशों को एक समूह है – 10 आसियान देशों (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्याँमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम) और उनके 6 FTA (Free Trade Agreement) भागीदारों- भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बीच प्रस्तावित एक मुक्त व्यापार समझौता है ।

Rcep kya hai
RCEP Kya Hai?- RCEP Full Form

 RCEP Kya Hai? – क्या है क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी ? 

इसकी औपचारिक शुरुआत नवंबर 2012 में कंबोडिया में आसियान शिखर सम्मेलन में की गई थी। इस समझौते के बारे में देशों के बीच वार्ता वर्ष 2012 से ही चल रही है परंतु इस पर अभी तक कोई एकमत होकर निर्णय नहीं लिया गया है।

  • इनके बीच में एक मुक्त व्यापार समझौता हो रहा है। जिसके बाद इन देशों के बीच बिना आयात शुल्क दिए व्यापार किया जा सकता है। आपको बता दें कि इस बार RCEP समझौते के लिए राजी 15 देशों ने सभी 20 मुद्दों के लिए वार्ता और अनिवार्य रूप से अपने सभी बाजार पहुंच मुद्दों पर निष्कर्ष निकाला है।
  • इस मेगा मुक्त व्यापार समझौता में वस्तु, सेवाओं, निवेश, आर्थिक और तकनीकी सहयोग, प्रतिस्पर्धा और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
  • आसियान देशों में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल है।

जिसका उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिये इसके सदस्य देशों के बीच व्यापार नियमों को उदार एवं सरल बनाना है।

 Importance of RCEP – RCEP का महत्व 

  • आरसेप में सम्मिलित देशों में पूरी दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी निवास करती है इससे विश्व की कुल जीडीपी में इनका एक तिहाई हिस्सेदारी भी है। 
  • इन देशों के मध्य आपसी व्यापार दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-चौथाई से भी अधिक है।
  • इसे  ट्रांस-पैसिफिक भागीदारी के एक विकल्प के रूप में भी देखा जाता है।
  • RCEP की अवधारणा जब क्रियाशील होगी तो लगभग 5 अरब लोगों की आबादी के लिहाज़ से यह सबसे बड़ा व्यापार ब्लॉक बन जाएगा।
  • विश्व के सकल घरेलू उत्पाद का अनुमानतः 40% और वैश्विक व्यापार का 30% प्रभुत्व होगा ।
  • महत्त्वाकांक्षी RCEP का एक अनूठा महत्त्व यह है कि इसमें एशिया की (चीन, भारत और जापान) तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं।
  • आरसीइपी समझौते में वस्तुओं का व्यापार, सेवाओं का व्यापार, निवेश, आर्थिक और तकनीकी सहयोग, बौद्धिक संपदा, प्रतिस्पर्द्धा, विवाद निपटान और अन्य मुद्दे शामिल होंगे।

 भारत को क्या फायदा होता RCEP से?(Trade Agreement Benefits) 

आरसीईपी एक बेहद ही महत्त्वाकांक्षी योजना है।इसका लाभ इससे जुड़ें देशों को मिलेगा

  • इससे भारत के वस्तु व्यापार में वृद्धि होती।
  • भारत को आसियान देशों का बाजार मिल सकता था।
  • समझौता होने के बाद चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से भारत में आने वाला निवेश भी बढ़ जाता।
  • सेवा क्षेत्र में भारत के निर्यात में वृद्धि हो सकती थी।
  • आरसीईपी समझौते से बाहर होने के बाद भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखला ( Global value chains) के लाभों से दूर हो सकता है।
  • पूर्वोत्तर भारत के जरिए व्यापार में वृद्धि से पूर्वोत्तर के राज्यों के आर्थिक विकास में भी मदद मिलता। इसे एक रणनीतिक लाभ के तौर पर देखा जा सकता है।

मौजूदा वक्त में, सेवा क्षेत्र के लिहाज से भारत की स्थिति काफी मजबूत है। लेकिन दिक्कत यह है कि आरसीईपी में वस्तुओं की तुलना में सेवाओं के व्यापार में ज्यादा छूट नहीं है। ऐसे में, भारत को इससे बहुत लाभ की उम्मीद नहीं है।

  • दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ भी भारत का व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका
  • इसमें बौद्धिक संपदा के कड़े नियम शामिल है। इसके चलते भारत का जेनेरिक दवा उद्योग प्रभावित हो सकता है।
  • आयात शुल्क खत्म करने से भारत के कृषि आधारित उद्योगों, वाहन, दवा और स्टील के प्रभावित होने की आशंका
  • चीनी सामान की ज़्यादा आपूर्ति से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित हो सकता है।
  • कई सालों से लगातार कई दौर की वार्ता के बावजूद यह समझौता भारत की मांगों के अनुसार आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

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