Indian History GK Notes for UPSC | Slave Dynasty Notes {** कुतुबुद्दीन ऐबक – गुलाम वंश**}

भारतीय इतिहास - कुतुबुद्दीन ऐबक - गुलाम वंश के बारे में सम्पूर्ण नोट्स

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Indian History GK Notes pdf Hindi –आज SarkariNaukriHelp आप सब छात्रों के लिए इतिहास – History GK Notes for UPSC Study Material PDF – से सम्बंधित महत्वपूर्ण नोट्स Indian History Notes For UPSC Pdf” शेयर कर रहा है. इस भाग में आप सब छात्रों के लिए Slave Dynasty –गुलाम वंश के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के बारे में महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्यो की जानकारी पढ़ने को मिलेगी।
वे छात्र जो  SSC Graduate Level Exams—CGL,CHSL, CPO Sub-Inspector, Section Officer(Audit), Tax Assiatant (Income Tax & Central Excise), Section,Officer (Commercial Audit),Banks-IBPS/SBI  PO Clerks,UPSSSC (उत्तर प्रदेश अधिनस्थ सेवा चयन बोर्ड), SSC Matric Level Exam,CISF,Railways Group C & D,KVS PRT-TGT-PGT,SSC Data Entry Operator, Intelligence Bureau(IB) तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है उनके लिये  ये भाग  काफी मददगार साबित होगा. आप SarkariNaukriHelp के द्वारा तैयार की गई इस Indian History pdf- Slave Dynasty Notes को Download करके अवश्य पढना चाहिए.
कुतुबुद्दीन ऐबक –गुलाम वंश
  • ऐबक का जन्म मध्य एशिया के कल्वरी तुर्क कबीले में हुआ था। बचपन में ही इसे दास के रुप में निशापुर के बाजार में एक काजी नें खरीदा था एवं अपने पुत्रों के साथ-साथ इसे भी सैनिक शिक्षा दी थी।काजी की म्रत्यु के बाद उसके पुत्रों नें इसे गजनी के बाजार में बेंच दिया एवं यह गोरी का गुलाम व दास बन गया।
  • 1206 ई0 में अपनी म्रत्यु के पूर्व गोरी नें ऐबक को मलिक एवं सिपाहसालार की उपधि दी तथा इसे अपना प्रतिनिधि (बली अहद) घोषित किया।
  • 15 मार्च 1206 ई0 में गोरी की म्रत्यु के बाद लाहौर के नागरिकों ने इसे आमंत्रित किया।
  • 24 जून 1206 ई0 में अपना राज्याभीषेक लाहौर में किया। इसने सुल्तान की उपाधि धारण नही की।
  • इसनें गोरी के समय  कुछ विद्रोहों का दमन भी किया था।
  • प्रथ्वी राज चौहान का भाई हरिराज ने तराईन के द्रितीय युद्ध के बाद लगातार तीन विद्रोह करके अजमेर पुन: वापस पाने का प्रयास किया।
  • 1194 ई0 हरिराज ने स्वयं को पराजित होता देखकर आग लगाकर आत्महत्या  कर ली।इसके उपलक्ष्य में ऐबक नें अजमेंर में संस्क्रत विद्यालय (विग्रहराज के द्वारा निर्मित) के स्थान पर अढाई दिन का झोपड़ा का निर्माण  1196 ई0 में प्रारम्भ किया जो 1200 ई0 में पूरा हुआ।इसकी दूसरी छत पर हरिकेल नाटक अंकित है तथा दिल्ली में “क्वावत-उल-इस्लाम” नामक दो मस्जिद का निर्माण करवाया।
  • 1195 में ऐबक ने कोईल का विद्रोह(अलीगढ़) का दमन किया।
  • 1195-96 ई0 में मालवा एवं ग्वालियर के अभियान में साथ दिया था।
  • 1202-1203 ई0 में ऐबक नें बुंदेलखण्ड पर और चंदेल शासक  परमर्दी देव को पराजित किया। परमर्दी देव की म्रत्यु के बाद उसके मंत्री अजय देव नें संघर्ष किया लेकिन पराजित हुआ। इस प्रकार कलिन्जर, महोबा एवं खजुराहो पर अधिकार कर लिया।
  • 1204-05 ई0 में ऐबक के साहायक सेना नायक बख्तियार खिलजी नें बीहार पर आक्रमण किया इसनें बिहार के उदन्त पुरी,बौद्ध मठ तथा नालन्दा एवं विक्रम शिला को लूटा एवं जलाकर नष्ट कर दिया।
  • बख्तियार खिलजी का सम्पूर्ण बिहार पर अधिकार हो गया। इसने बंगाल पर आक्रमण किया,लक्ष्मण सेन राजधानी छोड़कर भाग गया।बख्तियार नें दक्षिण-पश्चिम पर आक्रमण करके लखनौती को राजधानी बनाया।
  • बख्तियार खिलजी नें तिब्बत विजय की योजना बनाई थी लेकिन 1206 ई0 में खिलजी सरदार नें इसकी हत्या कर दी। अली मर्दान नें ज्यादा दिन तक शासन नही कर सका क्योकि बंगाल के खिलजी सरदारों नें विद्रोह कर दिया।अली मर्दन ने ऐबक से सहायता मांगी।
  • ऐबक नें कैमाज रुमी को भेजकर अली मर्दान को अपना अधिनता में बंगाल का शासक बनाया।
  • गोरी की म्रत्यू के बाद ऐबक को दो प्रतिद्वदियों का समना करना पड़ा 1- सिंध का गवर्नर नासिरुद्दीन कुवाचा 2.गजनी का शासक ताजुद्दीन एल्दौज
  • ऐबक ने इन दोनो से विवाह संबंधो के द्वारा अपनी स्थिति मजबूत करनें  का प्रयास किया। ऐबक नें कुवाचा से अपनी बहन की तथा एल्दौज की पुत्री से स्यवं विवाह किया।
  • एल्दौज ने पंजाब पर आक्रमण करना चाहा लेकिन ऐबक ने उसे भगा दिया।
  • ऐबक ने 1208 ई0 में गजनी पर आक्रमण किया लेकिन 40 दिन ठहरने के बाद लहौर वापस आना पड़ा क्योंकि गजनी की जनता ने विद्रोह कर दिया था।
  • ऐल्दौज एवं कुवाचा के भय के कारण ऐबक ने राजधानी लाहौर को ही बनाये रखा।
  • 1208 ई0 में गयासुद्दीन मुहम्मद ने ऐबक को छत्र एवं सिंहासन के प्रतीक भेज कर दासता से मुक्त कर दिया तथा सुल्तान की उपाधि भी दी। इसनें सुल्तान की उपाधि ग्रहण नही की।
  • 1210 ई0 में चोगान खेलते समय घोड़े से गिरने के कारण इसकी म्रत्यु हो गयी।
  • ऐबक को उसकी दानशीलता के कारण उसे लाख वक्क्ष कहा जाता है। इसे कुरान कंठस्थ एवं सुरीले स्वर में गाने के कारण कुरान ख्वाँ कहा जाता था।
  • ऐबक ने हसन निजामी एवं फक्र-ए-मुदव्विर जैसे इतिहास कारों को संरक्षण दिया।
  • इसनें दिल्ली में कुतुबमीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन बख्तियार काफी नामक सूफी संत की स्म्रति में प्रारम्भ किया था जो ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ति के शिष्य थे।
  • मोईनुद्दीन चिश्ती गोरी के साथ भारत आये और अजमेर में बस गये थे।
  • ऐबक की म्रत्यु के बाद 1210 ई0 में लाहौर के अमीरो ने आरम शाह को गद्दी पर बिठाया। लेकिन दिल्ली के कोतवाल अमीर अली इस्माइल व अन्य तुर्की सरदारों की सलाह  के बाद इल्तुतमिश को दिल्ली बुलाया गया।
  • आराम शाह नें दिल्ली पर आक्रमण करने की कोशिश की लेकिन इल्तुतमिश ने उसे पराजित कर दिया।
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